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आज का राहु काल और वह कैसे निकाला जाता है

तैयार और संचालित: AskJeevanGuru वैदिक शोध एवं संपादकीय डेस्क.

राहु काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय का आठवाँ हिस्सा होता है, और कौन सा आठवाँ हिस्सा है यह केवल वार पर निर्भर करता है — रविवार को 8वाँ भाग, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा। चूँकि यह स्थानीय सूर्योदय से नापा जाता है, इसका समय शहर और मौसम के साथ बदलता रहता है — यह कभी कोई निश्चित घड़ी का समय नहीं होता।

आज का राहु काल, गुलिक काल और यमगंड एक ही समयरेखा पर

New Delhi · 2026-10-22 · Thursday · सूर्योदय 06:27 · सूर्यास्त 17:46

भाग 1: 06:27 – 07:52यमगंड
भाग 2: 07:52 – 09:17कोई अशुभ काल नहीं
भाग 3: 09:17 – 10:42गुलिक काल
भाग 4: 10:42 – 12:07कोई अशुभ काल नहीं
भाग 5: 12:07 – 13:31कोई अशुभ काल नहीं
भाग 6: 13:31 – 14:56राहु काल
भाग 7: 14:56 – 16:21कोई अशुभ काल नहीं
भाग 8: 16:21 – 17:46कोई अशुभ काल नहीं

Thursday के लिए 06:27 – 17:46 के दिनमान को 8 बराबर भागों में बाँटा गया है, प्रत्येक भाग लगभग 85 मिनट का।

Daylight from sunrise to sunset is divided into eight equal parts. One part per weekday belongs to Rahu, and new work is traditionally not begun inside it. Because the parts are one-eighth of the actual daylight, Rahu Kaal is longer in summer than in winter and shifts with your city.

गणना कैसे होती है

उस तारीख का स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त लें। दोनों का अंतर निकालें — यही दिनमान है। इसे आठ बराबर भागों में बाँटें और सूर्योदय से गिनना शुरू करें। वार के अनुसार जो भाग राहु का है, वही राहु काल है। इसमें कोई ग्रह-स्थिति या जन्म कुंडली शामिल नहीं होती। इसीलिए दो वेबसाइटों का समय तभी अलग होता है जब उनका सूर्योदय डेटा अलग हो।

समय हर दिन क्यों बदलता है

साल भर दिनमान की लंबाई बदलती है, इसलिए उसका आठवाँ हिस्सा भी बदलता है। उत्तर भारत की सर्दियों में यह लगभग 65 मिनट का होता है और गर्मियों के चरम पर लगभग 85 मिनट का। देशांतर के कारण यह पश्चिम की ओर खिसकता भी है — इसीलिए एक ही दिन मुंबई और कोलकाता का राहु काल एक नहीं होता।

गुलिक काल और यमगंड के साथ पढ़ें

दिनमान के इन्हीं आठ भागों से गुलिक काल और यमगंड भी निकलते हैं, बस उनका भाग-क्रमांक अलग होता है। किसी भी दिन ये तीनों आठ भागों में से ठीक तीन भाग लेते हैं और कभी आपस में नहीं टकराते। राहु काल से बचकर यमगंड में काम शुरू कर देने का कोई अर्थ नहीं, इसलिए तीनों को एक साथ देखना अधिक उपयोगी है।

परंपरा वास्तव में क्या कहती है

शास्त्रीय सावधानी शुरुआत को लेकर है — यात्रा आरंभ, हस्ताक्षर, दुकान का उद्घाटन, पहली भेंट। पहले से चल रहे काम को जारी रखना समस्या नहीं माना जाता, और यह परंपरा कहीं यह दावा नहीं करती कि इस समय में अपने आप हानि होगी। तय शल्यक्रिया या बुक की गई उड़ान जैसे अनिवार्य कामों को भी सामान्यतः इसके कारण नहीं बदला जाता।

अपने शहर का राहु काल देखें

राहु काल स्थानीय सूर्योदय से नापा जाता है, इसलिए हर शहर का समय अलग होता है। नीचे दिए गए शहर-पेजों पर उसी शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला गया आज का राहु काल दिया गया है, गणना के साथ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज राहु काल कितने बजे है?+

ऊपर दी गई समयरेखा में आज का राहु काल दिया गया है, जो आज के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला गया है। यह हर दिन बदलता है, इसलिए कोई एक निश्चित समय याद रखने योग्य नहीं होता।

क्या राहु काल हर शहर में एक ही होता है?+

नहीं। यह स्थानीय सूर्योदय से नापा जाता है, इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई का समय एक ही दिन अलग-अलग होता है — अंतर कभी एक घंटे तक भी पहुँच जाता है।

क्या राहु काल मेरी जन्म कुंडली पर निर्भर करता है?+

नहीं। यह केवल सूर्योदय, सूर्यास्त और वार से निकलता है। इसमें व्यक्तिगत कुछ भी नहीं आता — यही इसकी सीमा भी है, क्योंकि यह नहीं बता सकता कि कोई तारीख आपके लिए अनुकूल है या नहीं।

राहु काल में कौन से काम टाले जाते हैं?+

परंपरा में नई शुरुआत टाली जाती है — यात्रा आरंभ, समझौते पर हस्ताक्षर, नया व्यापार या उद्घाटन। पहले से चल रहा काम, नित्य कर्म और पूजा-पाठ इससे प्रभावित नहीं माने जाते।

दूसरी वेबसाइट पर राहु काल थोड़ा अलग क्यों दिखता है?+

लगभग हमेशा सूर्योदय या सूर्यास्त का डेटा अलग होने के कारण, या सूर्योदय की परिभाषा में थोड़े अंतर के कारण। आठ भागों की गणना स्वयं मानक है और उस पर मतभेद नहीं है।

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राहु काल सबके लिए एक सामान्य दैनिक अवधि है, आपकी कुंडली की सलाह नहीं। कोई तारीख चुननी हो तो अपनी स्थिति के बारे में पूछें।

अपने समय के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें

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ज्योतिष का मार्गदर्शन आत्म-चिंतन और स्वयं को समझने के लिए है। इसे निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

यह परिणाम कैसे निकाला गया — लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन ग्रह स्थिति, फिर पारंपरिक नियम, फिर लिखित व्याख्या। हर परत अलग से चिह्नित है।