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ज्ञान

वैदिक ज्योतिष सीखें

नक्षत्रों और कुंडली के आधारभूत तत्वों को स्पष्ट, संदर्भपूर्ण भाषा में समझें।

सीखने का क्रम

आपके सवाल के लिए सही विषय और टूल

वैदिक ज्योतिष में गणना और पारंपरिक व्याख्या दो अलग चरण हैं। पहले जन्म-विवरण या शहर के आधार पर तथ्यात्मक गणना देखें, फिर उसका संदर्भ समझें। कोई भी गणना जीवन की घटना की गारंटी नहीं है।

विषय 2

महादशा की समयरेखा समझें

नौ ग्रहों की दशा अवधि और जन्म नक्षत्र से शुरुआती दशा कैसे तय होती है, समझें।

120 साल की सामान्य दशा-सारणी और व्यक्तिगत गणना से निकली तारीखों का अंतर समझें।

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विषय 3

36 गुणों का कुंडली मिलान समझें

सिर्फ कुल अंक नहीं, अष्टकूट के आठों गुणों को देखें। दक्षिण भारतीय पोरुथम अलग पद्धति है।

दोनों के जन्म विवरण जाँचें; अंकों को विवाह का अंतिम निर्णय न मानें।

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विषय 4

पंचांग के पाँच अंग जानें

तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जानें; शहर के अनुसार समय बदलने का कारण समझें।

अपना सही शहर चुनें; सूर्योदय पर आधारित समय हर स्थान पर समान नहीं होते।

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विषय 5

चौघड़िया और होरा में अंतर देखें

जानें कि सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार दिन-रात के समयखंड अलग क्यों होते हैं।

तारीख और शहर चुनें; यह पारंपरिक मार्गदर्शन है, निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं।

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विषय 6

नक्षत्रों को जानें

जन्म नक्षत्र, पारंपरिक नाम के अक्षर और दशा से जुड़े चंद्र-नक्षत्रों की मूल बातें जानें।

अश्विनी से शुरुआत करें और बाकी प्रकाशित नक्षत्र मार्गदर्शिकाएँ पढ़ें।

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जन्म का समय न पता हो तो बिना पुष्टि किए कोई समय न भरें। शहर आधारित पंचांग के लिए अपना वास्तविक स्थान चुनें।