आर्द्रा नक्षत्र
आर्द्रा 27 नक्षत्रों में छठा नक्षत्र है और मिथुन 6°40′–20°00′ तक फैला है। इसका ग्रह-स्वामी राहु है, इसलिए जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो विंशोत्तरी दशा राहु की महादशा से शुरू होती है, जिसकी पूरी अवधि 18 वर्ष है। इसके अधिष्ठाता देवता रुद्र हैं, प्रतीक आँसू की बूँद है, और चारों चरणों के नामाक्षर कु, घ, ङ, छ हैं।
आर्द्रा नक्षत्र का संदर्भ विवरण
- संस्कृत नाम
- आर्द्रा
- क्रम
- 27 में 6
- निरयन विस्तार
- मिथुन 6°40′–20°00′
- राशि
- मिथुन
- ग्रह-स्वामी (विंशोत्तरी)
- राहु — 18 वर्ष की दशा
- अधिष्ठाता देवता
- रुद्र
- प्रतीक
- आँसू की बूँद
- गण
- मनुष्य
- योनि
- श्वान (कुत्ता), मादा
- नाड़ी
- आदि
- मुहूर्त वर्ग
- तीक्ष्ण
- नामाक्षर
- कु, घ, ङ, छ
चारों चरण
| चरण | विस्तार | नवांश | नामाक्षर |
|---|---|---|---|
| 1 | मिथुन 6°40′–10°00′ | धनु | कु |
| 2 | मिथुन 10°00′–13°20′ | मकर | घ |
| 3 | मिथुन 13°20′–16°40′ | कुंभ | ङ |
| 4 | मिथुन 16°40′–20°00′ | मीन | छ |
विस्तार मानक 27 भाग वाले निरयन विभाजन पर आधारित है (हर नक्षत्र 13°20′, हर चरण 3°20′)। स्वामी विंशोत्तरी क्रम के अनुसार हैं; गण, योनि, नाड़ी और नामाक्षर सामान्य अवकहड़ा चक्र से लिए गए हैं। क्षेत्रीय पंचांगों में प्रतीक और अक्षरों की वर्तनी कभी-कभी भिन्न होती है।
आर्द्रा के देवता, प्रतीक और अर्थ
आर्द्रा, यानी ‘नमी वाली’, लाल तारा बीटलज्यूस है और इसके देवता रुद्र — शिव का तूफ़ानी रूप — हैं। इसका प्रतीक आँसू की बूँद है। यहाँ तूफ़ान और आँसू मुक्ति के प्रतीक हैं: वह वर्षा जो भारी हवा को साफ़ कर देती है। परंपरा आर्द्रा को तीव्रता, तीक्ष्ण बुद्धि, सच्ची भावना और उथल-पुथल के बाद फिर से गढ़ने की क्षमता से पढ़ती है — यह सुविधा से अधिक परिवर्तन का नक्षत्र है।
जन्म कुंडली में आर्द्रा
जन्म के समय चंद्रमा आर्द्रा में हो तो यही आपका जन्म नक्षत्र है — इसी से नामाक्षर, विंशोत्तरी दशा का क्रम और कुंडली मिलान तय होते हैं। आर्द्रा का स्वामी राहु है और यह मिथुन में स्थित है, इसलिए फल पढ़ते समय राहु के साथ राशि-स्वामी (बुध) को भी देखा जाता है। लग्न या कोई अन्य ग्रह आर्द्रा में हो तो वही प्रतीक उस पर लागू होता है, पर फल उस ग्रह के बल, भाव और दृष्टियों पर निर्भर करता है; नक्षत्र किसी स्थिति को सूक्ष्म बनाता है, उसे पलटता नहीं।
मुहूर्त: आर्द्रा किन कामों के लिए चुना जाता है
मुहूर्त ग्रंथों में यह तीक्ष्ण नक्षत्र है, जिसे परंपरागत रूप से शुभ आरंभ के बजाय किसी चीज़ को समाप्त करने, अलग करने या सामना करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे किसी चीज़ को समाप्त करने, अलग करने या सामना करने के लिए रखा जाता है — विवाह या अन्य शुभ आरंभ के लिए नहीं। पूरा मुहूर्त फिर भी तिथि, वार, स्थानीय सूर्योदय और व्यक्तिगत कुंडली देखता है, इसलिए केवल नक्षत्र से तारीख तय नहीं होती।
कुंडली मिलान में गण, योनि और नाड़ी
आर्द्रा का गण मनुष्य, योनि श्वान (कुत्ता), मादा और नाड़ी आदि है। अष्टकूट गुण मिलान में ये तीनों गण कूट (6 अंक), योनि कूट (4 अंक) और नाड़ी कूट (8 अंक) में जाते हैं — कुल 36 में से 18 अंक। ये दोनों व्यक्तियों के जन्म नक्षत्रों की तुलना करते हैं, इसलिए अकेले किसी व्यक्ति का वर्णन नहीं करते, और किसी एक कूट में कम अंक को फैसला नहीं, पूरी कुंडली के संदर्भ में तौला जाता है।
आपकी कुंडली में इसका क्या अर्थ है
आर्द्रा का सामान्य विवरण यह नहीं बता सकता कि आपकी कुंडली में वहाँ कौन सा ग्रह है, वह किस भाव का स्वामी है या कौन सी दशा चल रही है। अपनी मुफ़्त कुंडली बनाकर देखें कि आर्द्रा आपके लिए कहाँ पड़ता है, फिर उसी स्थिति के बारे में AI ज्योतिषी से पूछें — इस पेज को निजी भविष्यवाणी न मानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी कौन है?+
विंशोत्तरी पद्धति में आर्द्रा का स्वामी राहु है। यदि आपका चंद्रमा आर्द्रा में है तो दशा क्रम राहु से शुरू होता है, जिसकी पूरी अवधि 18 वर्ष है; जन्म के समय शेष अवधि इस पर निर्भर करती है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था।
आर्द्रा नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?+
चारों चरणों के अक्षर क्रम से कु, घ, ङ, छ हैं — हर चरण का एक। चरण जन्म के समय चंद्रमा की सटीक डिग्री से तय होता है, इसलिए जन्म समय से पता चलता है कि कौन सा अक्षर लागू है; बहुत से परिवार चारों को ही उपलब्ध मानते हैं।
आर्द्रा नक्षत्र किस राशि में है?+
आर्द्रा मिथुन 6°40′–20°00′ तक फैला है। चारों चरण एक ही राशि में हैं, इसलिए इसमें कहीं भी चंद्रमा हो तो चंद्र राशि वही रहती है।
क्या आर्द्रा शुभ या अशुभ नक्षत्र है?+
कोई भी नक्षत्र अपने आप में शुभ या अशुभ नहीं होता। मुहूर्त ग्रंथ आर्द्रा को तीक्ष्ण नक्षत्र मानते हैं, जो बताता है कि यह परंपरागत रूप से किस प्रकार के काम के लिए उपयुक्त है — इसमें जन्मे व्यक्ति का मूल्य नहीं। फल वहाँ स्थित ग्रह, उसके भाव और चल रही दशा पर निर्भर करता है।
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