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दीपावली 2026: तिथि, महत्व और पूजा विधि

तैयार और संचालित: AskJeevanGuru वैदिक शोध एवं संपादकीय डेस्क.

दीपावली 2026 8 नवंबर 2026 (रविवार) को है, नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार, और यह कार्तिक अमावस्या पर आधारित है। दीपावली कार्तिक की अमावस्या की रात्रि है, जिसे वर्ष की प्रमुख लक्ष्मी पूजा और श्रीराम के अयोध्या आगमन के दिन के रूप में मनाया जाता है। आगे पढ़ें — पर्व का अर्थ, पूजा विधि, क्षेत्रीय भेद और तैयारी। कार्यक्रम तय करने से पहले अपने शहर की तिथि और मुहूर्त अवश्य देख लें।

मिलान की गई पंचांग तिथि और पर्व का संदर्भ

तिथि
8 नवंबर 2026
वार
रविवार
पंचांग स्थिति
कार्तिक अमावस्या
अन्य नाम
दिवाली, लक्ष्मी पूजा
संदर्भ स्थान
नई दिल्ली, भारत
समय क्षेत्र
Asia/Kolkata

2026–2027 तिथि तुलना

वर्षसंदर्भ तिथि
20268 नवंबर 2026
202729 अक्टूबर 2027

तिथियाँ नई दिल्ली (एशिया/कोलकाता) संदर्भ पंचांग से हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं।

मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है — समय तय करने से पहले अपने स्थान का पंचांग देखें।

पूजा विधि का वर्णन प्रचलित परंपरा पर आधारित सांकेतिक मार्गदर्शन है, किसी एक परंपरा का निर्णय नहीं।

दीपावली का अर्थ और महत्व

दीपावली कार्तिक की अमावस्या की रात्रि है, जिसे वर्ष की प्रमुख लक्ष्मी पूजा और श्रीराम के अयोध्या आगमन के दिन के रूप में मनाया जाता है। यहाँ दी गई तिथि मुख्य लक्ष्मी पूजा की है; दीपावली एक ही दिन नहीं, धनतेरस से भाई दूज तक चलने वाला क्रम है।

दीपावली कैसे मनाई जाती है

घर की सफाई और सज्जा होती है, द्वार पर रंगोली और दीप रखे जाते हैं, और सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है। परिवार मिष्ठान्न का आदान-प्रदान करते हैं, छोटे उधार चुकाते हैं और केवल विद्युत लड़ियों के स्थान पर दीप पंक्तियाँ जलाते हैं। व्यापारी बहीखाते बंद कर नए आरंभ करते हैं।

क्षेत्रीय भेद

तमिलनाडु में दीपावली मुख्यतः नरक चतुर्दशी के प्रातः तेल स्नान के साथ मनाई जाती है। बंगाल, ओडिशा और असम में इसी अमावस्या पर काली पूजा होती है। गुजरात में अगले दिन नववर्ष आरंभ होता है और जैन परंपरा में यह रात्रि महावीर निर्वाण की है। नेपाल में यह तिहार के भीतर आता है।

8 नवंबर 2026 की तैयारी

पूजा का समय अपने शहर के पंचांग से देखें, क्योंकि सूर्यास्त के अनुसार संध्या का काल भिन्न होता है और अमावस्या सर्वत्र एक ही घड़ी पर आरंभ नहीं होती। मिष्ठान्न और दीप पहले मँगा लें। पटाखे चलाएँ तो अपने शहर के नियम और समय-सीमा देखें और उन्हें दीप तथा वस्त्र से दूर रखें।

तिथि प्रतिवर्ष क्यों बदलती है

तिथि कार्तिक अमावस्या पर आधारित है, इसलिए यह अक्टूबर मध्य से नवंबर मध्य के बीच पड़ती है और प्रतिवर्ष बदलती है। 2026 की संदर्भ तिथि 8 नवंबर 2026 है और 2027 की तिथि 29 अक्टूबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख दोहराने के स्थान पर उसी वर्ष का पंचांग देखें।

संदर्भ स्थान और समीक्षा

इस पृष्ठ की तिथियाँ नई दिल्ली, भारत (एशिया/कोलकाता) को संदर्भ स्थान मानकर दी गई हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं। मुहूर्त, तिथि की संधि और क्षेत्रीय परंपराएँ शहर और परंपरा के अनुसार बदलती हैं, इसलिए यहाँ दी गई जानकारी योजना बनाने के लिए सांकेतिक मार्गदर्शन है, आपके परिवार या मंदिर की परंपरा का स्थान नहीं लेती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में दीपावली कब है?+

नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार दीपावली 2026 8 नवंबर 2026 (रविवार) को है। तिथि कार्तिक अमावस्या पर आधारित है, इसलिए यह अक्टूबर मध्य से नवंबर मध्य के बीच पड़ती है और प्रतिवर्ष बदलती है।

दीपावली क्यों मनाई जाती है?+

दीपावली कार्तिक की अमावस्या की रात्रि है, जिसे वर्ष की प्रमुख लक्ष्मी पूजा और श्रीराम के अयोध्या आगमन के दिन के रूप में मनाया जाता है। यहाँ दी गई तिथि मुख्य लक्ष्मी पूजा की है; दीपावली एक ही दिन नहीं, धनतेरस से भाई दूज तक चलने वाला क्रम है।

घर पर दीपावली की पूजा विधि क्या है?+

घर की सफाई और सज्जा होती है, द्वार पर रंगोली और दीप रखे जाते हैं, और सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश का पूजन होता है। परिवार मिष्ठान्न का आदान-प्रदान करते हैं, छोटे उधार चुकाते हैं और केवल विद्युत लड़ियों के स्थान पर दीप पंक्तियाँ जलाते हैं। व्यापारी बहीखाते बंद कर नए आरंभ करते हैं।

2027 में तिथि यही रहेगी?+

नहीं। 2027 की संदर्भ तिथि 29 अक्टूबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख बिना पंचांग देखे नए वर्ष में न मानें।

क्या दीपावली हर जगह एक ही दिन होती है?+

सदैव नहीं। तमिलनाडु में दीपावली मुख्यतः नरक चतुर्दशी के प्रातः तेल स्नान के साथ मनाई जाती है। बंगाल, ओडिशा और असम में इसी अमावस्या पर काली पूजा होती है। गुजरात में अगले दिन नववर्ष आरंभ होता है और जैन परंपरा में यह रात्रि महावीर निर्वाण की है। नेपाल में यह तिहार के भीतर आता है।

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