गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, महत्व और पूजा विधि
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गणेश चतुर्थी 2026 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को है, नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार, और यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर आधारित है। गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश की स्थापना होती है और यहीं से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला उत्सव आरंभ होता है। आगे पढ़ें — पर्व का अर्थ, पूजा विधि, क्षेत्रीय भेद और तैयारी। कार्यक्रम तय करने से पहले अपने शहर की तिथि और मुहूर्त अवश्य देख लें।
मिलान की गई पंचांग तिथि और पर्व का संदर्भ
- तिथि
- 14 सितंबर 2026
- वार
- सोमवार
- पंचांग स्थिति
- भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
- अन्य नाम
- विनायक चतुर्थी, गणेशोत्सव
- संदर्भ स्थान
- नई दिल्ली, भारत
- समय क्षेत्र
- Asia/Kolkata
2026–2027 तिथि तुलना
| वर्ष | संदर्भ तिथि |
|---|---|
| 2026 | 14 सितंबर 2026 |
| 2027 | 4 सितंबर 2027 |
तिथियाँ नई दिल्ली (एशिया/कोलकाता) संदर्भ पंचांग से हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं।
मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है — समय तय करने से पहले अपने स्थान का पंचांग देखें।
पूजा विधि का वर्णन प्रचलित परंपरा पर आधारित सांकेतिक मार्गदर्शन है, किसी एक परंपरा का निर्णय नहीं।
गणेश चतुर्थी का अर्थ और महत्व
गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश की स्थापना होती है और यहीं से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला उत्सव आरंभ होता है। गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माने जाते हैं, इसलिए इस दिन कार्य, विद्या और नए उपक्रम का आरंभ व्यापक रूप से किया जाता है।
गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है
प्रतिमा की स्थापना मध्याह्न काल में प्राणप्रतिष्ठा के साथ होती है, फिर दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक और नारियल अर्पित किए जाते हैं। चुने हुए दिनों तक प्रातः और संध्या आरती होती है, और विसर्जन कुल परंपरा के अनुसार पहले, तीसरे, पाँचवें, सातवें या दसवें दिन किया जाता है।
क्षेत्रीय भेद
महाराष्ट्र में सबसे बड़ा सार्वजनिक आयोजन होता है — पुणे और मुंबई के मंडल, लालबागचा राजा और दगडूशेठ पंडाल। गोवा में इसे चवथ कहते हैं, जहाँ फल-सब्जियों की मातोली विशेष है। तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र में यह विनायक चतुर्थी है, मुख्यतः घर में। इस रात्रि चंद्र दर्शन से परंपरा में बचा जाता है।
14 सितंबर 2026 की तैयारी
प्रतिमा लेने से पहले दिनों की संख्या तय करें, क्योंकि विसर्जन की योजना उसी पर निर्भर है। स्थानीय जलाशय में विसर्जन करना हो तो कच्ची मिट्टी की प्रतिमा और प्राकृतिक रंग चुनें और नगर के निर्धारित विसर्जन स्थल देख लें। मोदक एक दिन पहले मँगा लें या बनाने की तैयारी रखें।
तिथि प्रतिवर्ष क्यों बदलती है
यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है, जो अगस्त के अंत या सितंबर में पड़ती है और प्रतिवर्ष बदलती है। 2026 की संदर्भ तिथि 14 सितंबर 2026 है और 2027 की तिथि 4 सितंबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख दोहराने के स्थान पर उसी वर्ष का पंचांग देखें।
संदर्भ स्थान और समीक्षा
इस पृष्ठ की तिथियाँ नई दिल्ली, भारत (एशिया/कोलकाता) को संदर्भ स्थान मानकर दी गई हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं। मुहूर्त, तिथि की संधि और क्षेत्रीय परंपराएँ शहर और परंपरा के अनुसार बदलती हैं, इसलिए यहाँ दी गई जानकारी योजना बनाने के लिए सांकेतिक मार्गदर्शन है, आपके परिवार या मंदिर की परंपरा का स्थान नहीं लेती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में गणेश चतुर्थी कब है?+
नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी 2026 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को है। यह भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है, जो अगस्त के अंत या सितंबर में पड़ती है और प्रतिवर्ष बदलती है।
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?+
गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश की स्थापना होती है और यहीं से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला उत्सव आरंभ होता है। गणेश विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माने जाते हैं, इसलिए इस दिन कार्य, विद्या और नए उपक्रम का आरंभ व्यापक रूप से किया जाता है।
घर पर गणेश चतुर्थी की पूजा विधि क्या है?+
प्रतिमा की स्थापना मध्याह्न काल में प्राणप्रतिष्ठा के साथ होती है, फिर दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक और नारियल अर्पित किए जाते हैं। चुने हुए दिनों तक प्रातः और संध्या आरती होती है, और विसर्जन कुल परंपरा के अनुसार पहले, तीसरे, पाँचवें, सातवें या दसवें दिन किया जाता है।
2027 में तिथि यही रहेगी?+
नहीं। 2027 की संदर्भ तिथि 4 सितंबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख बिना पंचांग देखे नए वर्ष में न मानें।
क्या गणेश चतुर्थी हर जगह एक ही दिन होती है?+
सदैव नहीं। महाराष्ट्र में सबसे बड़ा सार्वजनिक आयोजन होता है — पुणे और मुंबई के मंडल, लालबागचा राजा और दगडूशेठ पंडाल। गोवा में इसे चवथ कहते हैं, जहाँ फल-सब्जियों की मातोली विशेष है। तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र में यह विनायक चतुर्थी है, मुख्यतः घर में। इस रात्रि चंद्र दर्शन से परंपरा में बचा जाता है।
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