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करवा चौथ 2026: तिथि, महत्व और पूजा विधि

तैयार और संचालित: AskJeevanGuru वैदिक शोध एवं संपादकीय डेस्क.

करवा चौथ 2026 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को है, नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार, और यह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर आधारित है। करवा चौथ दिन भर का निर्जल व्रत है, जो मुख्यतः विवाहित स्त्रियाँ पति के कल्याण के लिए रखती हैं और संध्या को चंद्र दर्शन के बाद खोलती हैं। आगे पढ़ें — पर्व का अर्थ, पूजा विधि, क्षेत्रीय भेद और तैयारी। कार्यक्रम तय करने से पहले अपने शहर की तिथि और मुहूर्त अवश्य देख लें।

मिलान की गई पंचांग तिथि और पर्व का संदर्भ

तिथि
29 अक्टूबर 2026
वार
गुरुवार
पंचांग स्थिति
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
अन्य नाम
करक चतुर्थी
संदर्भ स्थान
नई दिल्ली, भारत
समय क्षेत्र
Asia/Kolkata

2026–2027 तिथि तुलना

वर्षसंदर्भ तिथि
202629 अक्टूबर 2026
202718 अक्टूबर 2027

तिथियाँ नई दिल्ली (एशिया/कोलकाता) संदर्भ पंचांग से हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं।

मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है — समय तय करने से पहले अपने स्थान का पंचांग देखें।

पूजा विधि का वर्णन प्रचलित परंपरा पर आधारित सांकेतिक मार्गदर्शन है, किसी एक परंपरा का निर्णय नहीं।

करवा चौथ का अर्थ और महत्व

करवा चौथ दिन भर का निर्जल व्रत है, जो मुख्यतः विवाहित स्त्रियाँ पति के कल्याण के लिए रखती हैं और संध्या को चंद्र दर्शन के बाद खोलती हैं। जिस टोंटीदार मिट्टी के पात्र से चंद्र को जल अर्पित किया जाता है, उसी 'करवा' से दिन का नाम बना है। अब अनेक घरों में पति भी व्रत रखते हैं।

करवा चौथ कैसे मनाई जाती है

दिन का आरंभ सूर्योदय से पूर्व सरगी से होता है, जो सास की ओर से भेजी जाती है। इसके बाद चंद्रोदय तक अन्न-जल का त्याग रहता है। संध्या को स्त्रियाँ परंपरागत वस्त्रों में एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं, थालियाँ फेरती हैं, और चंद्र दर्शन के बाद छलनी से चंद्र तथा पति का मुख देखकर पति के हाथ से जल लेती हैं।

क्षेत्रीय भेद

यह व्रत पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और मध्य प्रदेश में सर्वाधिक प्रचलित है। दक्षिण और पूर्व भारत के अधिकांश भाग में यह परंपरागत व्रत नहीं है, यद्यपि प्रवास और चलचित्रों के कारण वहाँ के नगरों में भी दिखने लगा है। पंजाब की सरगी की रीति और राजस्थान के करवे की बनावट में स्पष्ट अंतर है।

29 अक्टूबर 2026 की तैयारी

व्रत खोलने का निर्णय चंद्रोदय से होता है, जो शहर और दिन के अनुसार भिन्न है, इसलिए राष्ट्रीय समय के स्थान पर अपने शहर का समय देखें। सरगी हल्की परंतु पर्याप्त रखें और पिछली रात्रि भरपूर जल पिएँ। गर्भवती, मधुमेह, रक्ताल्पता से ग्रस्त या नियमित औषधि लेने वाली स्त्रियाँ निर्जल व्रत से पूर्व चिकित्सक से परामर्श करें।

तिथि प्रतिवर्ष क्यों बदलती है

व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ता है, दीपावली से लगभग नौ दिन पूर्व, और प्रतिवर्ष बदलता है। 2026 की संदर्भ तिथि 29 अक्टूबर 2026 है और 2027 की तिथि 18 अक्टूबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख दोहराने के स्थान पर उसी वर्ष का पंचांग देखें।

संदर्भ स्थान और समीक्षा

इस पृष्ठ की तिथियाँ नई दिल्ली, भारत (एशिया/कोलकाता) को संदर्भ स्थान मानकर दी गई हैं और एक से अधिक प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं। मुहूर्त, तिथि की संधि और क्षेत्रीय परंपराएँ शहर और परंपरा के अनुसार बदलती हैं, इसलिए यहाँ दी गई जानकारी योजना बनाने के लिए सांकेतिक मार्गदर्शन है, आपके परिवार या मंदिर की परंपरा का स्थान नहीं लेती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में करवा चौथ कब है?+

नई दिल्ली संदर्भ पंचांग के अनुसार करवा चौथ 2026 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को है। व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ता है, दीपावली से लगभग नौ दिन पूर्व, और प्रतिवर्ष बदलता है।

करवा चौथ क्यों मनाई जाती है?+

करवा चौथ दिन भर का निर्जल व्रत है, जो मुख्यतः विवाहित स्त्रियाँ पति के कल्याण के लिए रखती हैं और संध्या को चंद्र दर्शन के बाद खोलती हैं। जिस टोंटीदार मिट्टी के पात्र से चंद्र को जल अर्पित किया जाता है, उसी 'करवा' से दिन का नाम बना है। अब अनेक घरों में पति भी व्रत रखते हैं।

घर पर करवा चौथ की पूजा विधि क्या है?+

दिन का आरंभ सूर्योदय से पूर्व सरगी से होता है, जो सास की ओर से भेजी जाती है। इसके बाद चंद्रोदय तक अन्न-जल का त्याग रहता है। संध्या को स्त्रियाँ परंपरागत वस्त्रों में एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं, थालियाँ फेरती हैं, और चंद्र दर्शन के बाद छलनी से चंद्र तथा पति का मुख देखकर पति के हाथ से जल लेती हैं।

2027 में तिथि यही रहेगी?+

नहीं। 2027 की संदर्भ तिथि 18 अक्टूबर 2027 है। पिछले वर्ष की तारीख बिना पंचांग देखे नए वर्ष में न मानें।

क्या करवा चौथ हर जगह एक ही दिन होती है?+

सदैव नहीं। यह व्रत पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और मध्य प्रदेश में सर्वाधिक प्रचलित है। दक्षिण और पूर्व भारत के अधिकांश भाग में यह परंपरागत व्रत नहीं है, यद्यपि प्रवास और चलचित्रों के कारण वहाँ के नगरों में भी दिखने लगा है। पंजाब की सरगी की रीति और राजस्थान के करवे की बनावट में स्पष्ट अंतर है।

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